महत्वपूर्ण सुरक्षा संकेत

महत्वपूर्ण सुरक्षा संकेतों के प्रकार

सूचनात्मक संकेत (Informational Symbols)

ये संकेत वर्गाकार होते हैं। इनको हरी पृष्ठभूमि (Green Background) पर सफेद रंग की आकृति द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इनके द्वारा विविध प्रकार की सूचनाएं दी जाती हैं।

साधारण सुरक्षा नियम (General Safety Rules)

जब भी हम संपूर्ण सुरक्षा की बात करते हैं तो उसमें अपनी सुरक्षा के साथ ही मशीनों की सुरक्षा तथा कार्यखंड की सुरक्षा भी सन्निहित रहती है। किसी मशीन या किसी टूल का गलत प्रयोग करने से दुर्घटना होती है। दुर्घटना होने की स्थिति में या तो स्वयं प्रशिक्षार्थी को चोट लगती है अथवा कीमती मशीन या टूल खराब हो सकता है अथवा टूट सकता है। दुर्घटना के समय यदि प्रशिक्षार्थी कोई पार्ट बना रहा होगा तो उस समय वह अपने पार्ट को भी खराब कर लेता है। कार्यशाला में रहकर हर प्रशिक्षार्थी का एवं प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद कार्मिक होने के नाते उसका कर्तव्य है की वह निम्नलिखित तीन बातों की जानकारी रखे तथा उसके लिए प्रत्येक नियम का पालन करे।

  1. स्वयं अपनी सुरक्षा (Self Safety),
  2. मशीनों की सुरक्षा (Safety of Machines),
  3. कार्यखंड की सुरक्षा (Safety of Workpiece)

महत्वपूर्ण सुरक्षा संकेत

स्वयं अपनी सुरक्षा (Self Safety)

स्वयं अपनी सुरक्षा को दो भागों में विभाजित कर अध्ययन किया जा सकता है

कार्यशाला में सुरक्षा (Safety in Workshop)

जैसा की ऊपर बताया गया है की जब कोई कारीगर बिना संपर्क जानकारी के किसी मशीन या टूल का प्रयोग करता है तो वह दुर्घटना का शिकार हो सकता है। इसके लिए बहुत से नियम हैं जिनका पालन करके ही हम कार्यशाला में सुरक्षित रह सकते हैं। इसलिए हमारा कर्तव्य है की हम अपनी सुरक्षा के लिए इन नियमों का पालन करें

  • कार्यशाला में सदैव बूट पहनकर चलना चाहिए क्योंकि मशीनों से निकले लोहे के चिप्स पैर में लगने पर घाव होने का भय रहता है।
  • कार्यशाला में कभी भी ढीले कपड़े, डाई, मफलर इत्यादि पहनकर कार्य न करें। इनसे चलती मशीनों पर दुर्घटना होने का सदैव भय रहता है।
  • मशीन पर कार्य करते समय किसी दूसरे कारीगर के साथ बातचीत न करें। अपना ध्यान अपने कार्य में लगाएं, मन लगाकर कार्य करने वाला कारीगर ही अच्छा कार्य कर सकता है और ऐसा करने से दुर्घटना होने का भय भी कम रहता है।
  • किसी भी मशीन की जानकारी प्राप्त किए बिना मशीन को न चलाएं, क्योंकि खेल-ही-खेल में कीमती मशीनों की तथा स्वयं अपनी दुर्घटना होने की संभावना रहती है।
  • किसी चलती मशीन के साथ छेड़खानी करना दुर्घटना को ही बुलावा देना है, इसलिए चलती मशीन के सहारे न तो खड़ा ही होना चाहिए और न ही उस पर बैठना चाहिए।
  • किसी चलते पार्ट के पास यदि खड़े होकर कार्य करना हो तो चलते पार्ट पर सुरक्षा गार्ड (Safety Guard) अवश्य लगाएं, क्योंकि किसी भी समय इससे दुर्घटना होने का भय रहता है।

कार्यशाला में सुरक्षा के कुछ अन्य तारिके

किसी भी लटकते हुए वजन के नीचे खड़े होकर काम न करें, क्योंकि वजन के गिरने से भारी दुर्घटना हो सकती है। या अगर कोई भी कारीगर किसी ऊपरी स्थान पर (Overhead) कार्य कर रहा हो तो उसे चाहिए की वह हर टूल (Tool) को मजबूती से पकड़कर कार्य करें। स्पैनर, हैमर या चीजल जैसा टूल नीचे गिरने पर किसी भी कर्मचारी को लग सकता है तथा लटकते हुए पार्ट से सावधान रहे, क्योंकि उसके सिर पर लगने का डर रहता है। ऐसे संस्थानों में सभी कर्मचारियों को हमेशा हैलमेट का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा और भी महत्तवपूर्ण सावधानियां है जिन्हे हम एक-एक कर नीचे जानेगें

  • चलती हुई मशीनों में तेल देते समय तेल-कूप्पी (Funnel) का प्रयोग किया जाए।
  • किसी भी मशीन से निकलने वाले लोहे के चिप्स हाथ से न खींचें, चिप्स की तेज धार हाथ को काट शक्ति है।
  • किसी भी बाहरी व्यक्ति को कार्यशाला में लाने से पहले उसे कार्यशाला के मौलिक सिद्धांतों की जानकारी देना कारीगर (Worker) का ही कर्तव्य है।
  • बिजली के तारों को चलते हुए पाट्र्स के ऊपर से नहीं ले जाना चाहिए। रगड़ खाने से इंसुलेशन कट सकता है तथा कारीगर को शार्ट लग सकता है।
  • अधिक भारी समान को ध्यानपूर्वक उठाना चाहिए। लापरवाही के कारण मोच आने या अन्य दुर्घटना होने की संभावना रहती है।
  • प्रयोग में आने वाले हस्त औजारों (Hand Tools) को उचित स्थान पर रखें, जिससे उनके नीचे गिरने पर चोट लगने की संभावना ही न रहे।
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